Saturday, June 13, 2015

नाम से ग्रुप बना कोई कर तो नहीं रहा बदनाम

-सोशल नेटवर्किंग वाट्सएप की सुविधाओं का कुछ लोग कर रहे हैं बेजा इस्तेमाल -खुंदक निकालने के लिए भी बनाया जा रहा है वाट्सएप ग्रुप, हो रहे आपत्तिजनक पोस्ट इलाहाबाद, आनंद मिश्र वाकया एक: दारागंज के कमलेश यादव का स्मार्ट फोन लेकर उनके 15 साल के भतीजे ने उन्हीं के नाम से वाट्सएप ग्रुप बनाया और मोबाइल में जितने भी नंबर थे सभी को ग्रुप से जोड़ दिया। थोड़ी देर बाद कमलेश के एक दोस्त ने उन्हें फोनकर ग्रुप बनाने के बारे में पूछा तो कमलेश को जानकारी हुई। कमलेश ग्रुप लेफ्ट कर गए। अल्फाबेटिकली लिस्ट में जिनका नाम सबसे ऊपर था वह ग्रुप का एडमिन हो गया। लेकिन कमलेश की सिरदर्दी कम नहीं हुई। ग्रुप में जुड़े ज्यादातर लोग उनके परिचित थे। लिहाजा ग्रुप में कोई भी आपत्तिजनक मैसेज, वीडियो या फोटो पड़ने पर लोग कमलेश को फोनकर शिकायत करने लगे। वाकया दो: एक संस्था के पदाधिकारी ने बुधवार को अपनी ही संस्था के खिलाफ एक वाट्सएप ग्रुप बनाकर संस्था के कई सदस्यों को जोड़ दिया। थोड़ी देर बाद ग्रुप बनाने वाला पदाधिकारी लेफ्ट कर गया और जिनका नाम सबसे ऊपर था वे ग्रुप एडमिन हो गए। बाकी लोगों ने ग्रुप एडमिन को फोनकर पूछना शुरू कर दिया। उन्होंने नेट ऑन किया और एक संदेश लिख ग्रुप लेफ्ट कर गए। वाकया तीन: यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने फेमली ऑफ पुर्नजीवन के नाम से वाट्सएप ग्रुप बनाया है। एक दिन ग्रुप से जुड़े एक व्यक्ति ने आपत्तिजनक फोटो पोस्ट कर दी। ग्रुप में कई लड़कियां भी शामिल थीं। लोग ग्रुप बनाने वाले आलोक त्रिपाठी को कोसने लगे। आलोक ने ग्रुप पर अफसोस जताया। सफाई दी तो मामला शांत हुआ। इन तीनों प्रकरण से स्पष्ट है कि सोशल नेटवर्किंग वाट्सएप का बेजा इस्तेमाल भी शुरू हो गया है। कई लोग इस चक्कर में बिना कुछ किए ही बदनाम हो रहे हैं। कमलेश यादव को ही लीजिए, वह अपने दोस्तों को लगातार सफाई दे रहे हैं। ग्रुप पर आए आपत्तिजनक पोस्ट के कारण कई दोस्त उनसे नाराज भी हो गए। इसलिए वाट्सएप का प्रयोग करने वालों को खास तौर से सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। इस तरह कर सकते हैं बचाव नहीं दिखेगी फोटो: अगर आप अपनी पहचान को छिपाना चाहते हैं तो वाट्सएप की सेटिंग में जाकर पहले एकाउंट फिर प्राइवेसी पर क्लिक करें। प्रोफाइल फोटो पर क्लिक करें तो तीन विकल्प आएंगे- एव्रीवन, माई कांटेक्ट्स और नोबडी। माई काटेक्ट्स को क्लिक करने से सिर्फ वही लोग अपनी फोटो देख सकेंगे जिनका नंबर आपके मोबाइल में सेव है। नोबडी करने पर कोई भी आपकी फोटो देखकर पहचान नहीं कर सकेगा। नहीं पता चलेगा कब देखा: प्राइवेसी में ही लॉस्ट सीन का विकल्प भी दिया गया है। इसके जरिए यह सूचना सार्वजनिक होने से बचाई जा सकती है कि आपने वाट्सएप अंतिम समय कब देखा था। इसमें भी एव्रीवन, माई कांटेक्ट्स और नोबडी का विकल्प है। रीड रिसिप्ट्स के जरिए आप यह जानकारी भी छिपा सकते हैं कि आपने किसी का मैसेज देखा या नहीं। कर सकते हैं ब्लाक: अगर आपकी इच्छा के अनुसार कोई बार-बार आपके वाट्सएप पर मैसेज, फोटो या वीडियो भेज रहा है तो आप प्राइवेसी में जाकर उसे ब्लॉक भी कर सकते हैं। ग्रुप इनफो से करें जानकारी: अगर कोई आपको ग्रुप से जोड़ता है तो ग्रुप इनफो से यह देख लें कि उसका एडमिन कौन है। सभी सदस्यों के बारे में भी जानकारी कर लें। अगर एडमिन परिचित न हो तो ग्रुप से न ही जुड़े बेहतर है। बहुत मजबूत नहीं है प्राइवेसी पॉलिसी आईटी विशेषज्ञ शिवम दूबे कहते हैं कि फेसबुक पर बनने वाले ग्रुप तीन श्रेणी (पब्लिक, क्लोज्ड और सीक्रेट) के होते हैं। इसकी प्राइवेसी पॉलिसी मजबूत है लेकिन वाट्सएप पर फिलहाल ऐसा नहीं है। कोई भी किसी को भी बिना पूछे ग्रुप का सदस्य बना सकता है। इसमें ग्रुप का सदस्य बनाने से पहले ग्रुप के उद्देश्य के जानकारी देते हुए जुड़ने या न जुड़ने का विकल्प देना चाहिए। बकौल दुबे आपत्तिजनक मैसेज देना या बार-बार मना करने के बाद भी संदेश देना या ग्रुप से जोड़ना आईटी एक्ट की धारा 66ए के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। ऐसी स्थिति में आईपीसी की धारा 354 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

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