Sunday, September 15, 2013
सीसैट के बाद 20% कम हुए हिन्दी माध्यम के छात्र
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा (आईएएस) में सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूट टेस्ट (सीसैट) लागू होने के बाद सिर्फ हिन्दी ही नहीं कन्नड़, तमिल और तेलगु भाषा के परीक्षार्थियों को भी नुकसान हो रहा है। इसका प्रमाण वे आंकड़े हैं, जिसे प्रतियोगी छात्रों ने संघ लोक सेवा आयोग की ओर से हर साल राष्ट्रपति को भेजी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर जुटाया है। इन आंकड़ों से साफ है कि आईएएस मेन्स में अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों का प्रतिनिधित्व पहले की तुलना में काफी बढ़ा है।
प्रतियोगियों ने यह आंकड़े निबंध के कॉमन पेपर के आधार पर तैयार किए हैं। इसके मुताबिक 2010 की आईएएस मुख्य परीक्षा में शामिल 11777 परीक्षार्थियों में से 4156 यानी 35 प्रतिशत ने हिन्दी से निबंध दिया था। 2011 की प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट लागू होने के बाद यह प्रतिशत काफी कम हो गया। 2011 आईएएस मुख्य परीक्षा में कुल 11097 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इनमें हिन्दी से निबंध देने वाले परीक्षार्थियों की संख्या मात्र 1682 रही। जो कुल परीक्षार्थियों का 15 प्रतिशत ही है। स्पष्ट है कि सीसैट लागू होते ही मेन्स देने वाले हिन्दी माध्यम के परीक्षार्थियों की संख्या 20 प्रतिशत कम हो गई।
इसी तरह 2010 आईएएस मेन्स में कन्नड़ भाषा से निबंध देने वाले परीक्षार्थियों की संख्या 11 थी। 2011 में यह संख्या घटकर पांच रह गई। कुछ ऐसा ही हाल तेलगु और तमिल के साथ भी हुआ। 2010 के आईएएस मेन्स में 38 परीक्षार्थियों ने तमिल भाषा में निबंध दिया था। 2011 के मेन्स में इनकी संख्या घटकर 14 हो गई। वहीं 2010 में 69 परीक्षार्थियों ने तेलगु भाषा से निबंध दिया था। 2011 में इनकी संख्या मात्र 29 रही। वहीं मेन्स में अंग्रेजी माध्यम के छात्रों की संख्या में लगभग 20 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2010 के आईएएस मेन्स में शामिल 11777 परीक्षार्थियों में से 7329 यानी 62.23 प्रतिशत अंग्रेजी माध्यम के थे। 2011 का मेन्स देने वाले 11097 परीक्षार्थियों में से अंग्रेजी माध्यम के परीक्षार्थियों की संख्या 9203 रही। यह कुल परीक्षार्थियों का 82.93 प्रतिशत है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर परीक्षार्थियों द्वारा तैयार इन आंकड़ों से स्पष्ट हो जाता है कि सीसैट लागू होने के बाद हिन्दी माध्यम के छात्रों को तगड़ा झटका लगा है।
‘यह स्थिति तब की है जब केवल प्री में सीसैट लागू था। 2013 से मेन्स में भी सीसैट लागू कर दिया गया है। 2013 के मेन्स के बाद हिन्दी माध्यम के परीक्षार्थियों का हस्र और खराब हो जाएगा। हम अंग्रेजी के विरोधी नहीं हैं। हमारी मांग बस इतनी है कि हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के बीच असमानता को कम किया जाए।’
-संदीप, प्रतियोगी छात्र
बदला है पाठ्यक्रम तो बढ़ाएं अवसर
सिविल सेवा की तैयारी करने वाले प्रतियोगियों का कहना है कि प्री में सीसैट लागू कर इसकेलगभग 66 प्रतिशत तथा मेन्स में सीसैट लागू कर इसके लगभग 57 प्रतिशत पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। इसके बाद भी आयोग के अफसर अपने एक पत्र में कहते हैं कि पाठ्यक्रम में कोई मेजर बदलाव नहीं हुआ है जबकि आयोग के एक विज्ञापन में कहा जाता है कि पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। प्रतियोगियों की मांग है कि इस बदलाव को देखते हुए छात्रों को आईएएस परीक्षा देने के लिए तीन अतिरिक्त अवसर ( अटैम्प) दिए जाएंगे जबकि आयु सीमा में तीन साल की वृद्धि की जाए।
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