Sunday, June 27, 2010

खुलेगा टीले के नीचे दाा गंगा घाटी का रहस्य

इलाहाााद के झूंसी से नौ किलोमीटर दूर स्थित हेतापट्टी के टीले के नीचे कई ऐतिहासिक रहस्य छिपे हुए हैं। यह राज गंगा के मैदान के दस हजार साल पुराने इतिहास को सामने ला सकते हैं। संस्कृतियों का उद्भव कैसे हुआ, गंगा के किनारे खेती का और कैसे शुरू की गई, जैसे कई सवालों, जो आज तक आूझ पहेलीाने हुए, के उत्तर इस घाटी के नीचे दो हैं। यह राज जल्द जनता के सामने हो सकते हैं क्योंकि इलाहाााद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने इस स्थान पर स्थित चारों टीलों का उत्खनन करने का निर्णय लिया है। इसाारे में विभागाध्यक्ष एवं जानेमाने पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. जेएन पाल ने इविवि प्रशासन को 1.50 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) से उत्खनन की अनुमति लेने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
हेतापट्टी में छोटे-ाड़े चार टीले हैं। कुछ साल पहले प्रो. पाल की अगुवाई में इनमें से एक सासे छोटे टीले की खुदाई की गई थी। इस काम पर 62 हजार रुपये खर्च हुए थे। इस उत्खनन में कई अहम तथ्य सामने आए थे। प्रो. पाल कहते हैं कि नवपाषाणकाल की चीजें मिली थीं और मौर्य काल, शंगू काल, कुषाण काल तथा गुप्त काल के संकेत मिले थे। इस उत्खनन से यह भी स्पष्ट हुआ था कि प्रारंभिक मध्यकाल में भी यह स्थल आााद था।ाकौल प्रो. पाल इस स्थल का नाम हेतापट्टी इसलिए है क्योंकि यह पहले प्रमुख व्यापारिक केंद्र था। पट्टी का आशय पत्तन से है। इसकी पुष्टि खुदाई में यहां से मिले समुद्री शंख से होती है। अनुमान है किांगाल की खाड़ी से यह समुद्री शंख यहां लाए जाते थे। विभागाध्यक्ष प्रो. पाल कहते हैं कि भारत का सांस्कृतिक कलेवर गंगा घाटी से प्रभावित हुआ है।
पिछली खुदाई में एक और अहम तथ्य यह सामने आया था कि इस स्थल पर प्रारंभिक खेती (चावल की खेती) के प्रमाण मिले थे। यही वजह है कि पुरातत्व विशेषज्ञ इस स्थल को मध्य गंगा घाटी सभ्यता का पालना मानते हैं। प्रो. पाल कहते हैं कि सासे छोटे टीले की खुदाई में इतने तथ्य सामने आए थे तो चारों टीलों की खुदाई से निश्चित तौर पर कई और रहस्य से पर्दा उठेगा। यह उत्खनन गंगा के मैदान के साथ ही पूरे भारतीय सांस्कृतिक इतिहास से पुर्ननिर्माण में सहायक होगा। प्रो. पाल कहते हैं कि गंगा एक्सप्रेस वे इस रास्ते से प्रस्तावित है। सड़कानने केााद उत्खनन नहीं हो सकेगा इसलिए कोशिश की जा रही है कि यह काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

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