इलाहाााद के झूंसी से नौ किलोमीटर दूर स्थित हेतापट्टी के टीले के नीचे कई ऐतिहासिक रहस्य छिपे हुए हैं। यह राज गंगा के मैदान के दस हजार साल पुराने इतिहास को सामने ला सकते हैं। संस्कृतियों का उद्भव कैसे हुआ, गंगा के किनारे खेती का और कैसे शुरू की गई, जैसे कई सवालों, जो आज तक आूझ पहेलीाने हुए, के उत्तर इस घाटी के नीचे दो हैं। यह राज जल्द जनता के सामने हो सकते हैं क्योंकि इलाहाााद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने इस स्थान पर स्थित चारों टीलों का उत्खनन करने का निर्णय लिया है। इसाारे में विभागाध्यक्ष एवं जानेमाने पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. जेएन पाल ने इविवि प्रशासन को 1.50 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) से उत्खनन की अनुमति लेने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
हेतापट्टी में छोटे-ाड़े चार टीले हैं। कुछ साल पहले प्रो. पाल की अगुवाई में इनमें से एक सासे छोटे टीले की खुदाई की गई थी। इस काम पर 62 हजार रुपये खर्च हुए थे। इस उत्खनन में कई अहम तथ्य सामने आए थे। प्रो. पाल कहते हैं कि नवपाषाणकाल की चीजें मिली थीं और मौर्य काल, शंगू काल, कुषाण काल तथा गुप्त काल के संकेत मिले थे। इस उत्खनन से यह भी स्पष्ट हुआ था कि प्रारंभिक मध्यकाल में भी यह स्थल आााद था।ाकौल प्रो. पाल इस स्थल का नाम हेतापट्टी इसलिए है क्योंकि यह पहले प्रमुख व्यापारिक केंद्र था। पट्टी का आशय पत्तन से है। इसकी पुष्टि खुदाई में यहां से मिले समुद्री शंख से होती है। अनुमान है किांगाल की खाड़ी से यह समुद्री शंख यहां लाए जाते थे। विभागाध्यक्ष प्रो. पाल कहते हैं कि भारत का सांस्कृतिक कलेवर गंगा घाटी से प्रभावित हुआ है।
पिछली खुदाई में एक और अहम तथ्य यह सामने आया था कि इस स्थल पर प्रारंभिक खेती (चावल की खेती) के प्रमाण मिले थे। यही वजह है कि पुरातत्व विशेषज्ञ इस स्थल को मध्य गंगा घाटी सभ्यता का पालना मानते हैं। प्रो. पाल कहते हैं कि सासे छोटे टीले की खुदाई में इतने तथ्य सामने आए थे तो चारों टीलों की खुदाई से निश्चित तौर पर कई और रहस्य से पर्दा उठेगा। यह उत्खनन गंगा के मैदान के साथ ही पूरे भारतीय सांस्कृतिक इतिहास से पुर्ननिर्माण में सहायक होगा। प्रो. पाल कहते हैं कि गंगा एक्सप्रेस वे इस रास्ते से प्रस्तावित है। सड़कानने केााद उत्खनन नहीं हो सकेगा इसलिए कोशिश की जा रही है कि यह काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
Sunday, June 27, 2010
नौकरी की दौड़ में कुत्तेािल्ली भी!
कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की भर्ती परीक्षा में कुत्ते औरािल्ली भी नौकरी के लिए ‘आवेदन’ किया। आपको यह सुनकर हैरत तो होगी पर यह सच है कि एसएससी की पिछली भर्ती परीक्षाओं में ऐसे आवेदन पत्र मिले हैं, जिन पर अभ्यर्थी की फोटो के स्थान पर कुत्ता,ािल्ली या फिरािजली के खंभे की फोटो लगी हुई थी। कुछ लोगों की इस शरारत ने एसएससी के अफसरों की परेशानीाढ़ा दी है क्योंकि इन फर्जी आवेदन पत्रों को रद्द करने के लिए भी उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है, जिसमें समर्याााद होता है। यही वजह है कि आ इससेाचाव का रास्ता खोजा जा रहा है।
एसएससी ने संयुक्त स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा से ऑन लाइन आवेदन की शुरूआत की थी। इसकेााद एसएएस आप्रेंटिस भर्ती परीक्षा के लिए भी ऑन लाइन आवेदन लिया गया। ऑन लाइन आवेदन के लिए अलग वोसाइटानाई गई है। ऑन लाइन आवेदन से अभ्यर्थियों को सहूलियत हुई और भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में तेजी तो आई पर तकनीकी खामी से मुश्किलें भीाढ़ी हैं। अभ्यर्थियों का ऑन लाइन आवेदन पत्र तभी सामिट होता है, जा वेौंक में निर्धारित फीस जमा कर वहां से मिले ट्रांसफर चालान नांर को फार्म में फीड करते हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति तथा महिला अभ्यर्थियों से आवेदन की फीस नहीं ली जाती है इसलिए इनका आवेदन पत्रािना ट्रांसफर चालान नांर के भी सामिट हो जाता है। इसमें अभ्यर्थियों को कुछ खर्च नहीं करना पड़ता है। कुछ शरारती लोगों ने इसी का फायदा उठाते हुए कुत्ते,ािल्ली औरािजली के खंभे की फोटो लगाकर फर्जी नाम पते से आवेदन कर दिया। ऐसे 100 से अधिक आवेदन पत्र एसएससी को मिले हैं। फार्मों की स्क्रूटनी के वक्त यह मामला पकड़ में आया।
अभ्यर्थियों को आवेदन पत्र पर अपनी फोटो कम्प्यूटर से अटैच करनी होती है। स्क्रूटनी के वक्त अफसरों को ऐसा लगा कि फोटो गलत अचैट हो गई होगी पर जा उनका ध्यान आवेदक के नाम एवं अन्य सूचनाओं पर गया तो पता चला कि आवेदन ही सही नहीं हैं क्योंकि कई फार्म में नाम के स्थान पर अंग्रेजी वर्णमाला के कुछ अक्षर लिखे हुए थे। आ स्टोनोग्राफर ग्रेड ‘सी’ और ‘डी’ की भर्ती के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। इसका ऑन लाइन आवेदन तीस जून से प्रारंभ होगा तो अफसरों का अनुमान है कि इसमें भी इस तरह के फर्जी आवेदन हो सकते हैं।ोली रोड स्थित एसएससी मध्य क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक एके मिश्र कहते हैं कि किसी भी आवेदन पत्र को रद्द करने की एक निर्धारित प्रक्रिया है। अभ्यर्थियों को फार्म रद्द करने की वजह भीातानी पड़ती है। ऐसे फर्जी फार्मों की स्क्रूटनी में वक्र्ताााद होता है।
आनंद मिश्र, इलाहाााद
एसएससी ने संयुक्त स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा से ऑन लाइन आवेदन की शुरूआत की थी। इसकेााद एसएएस आप्रेंटिस भर्ती परीक्षा के लिए भी ऑन लाइन आवेदन लिया गया। ऑन लाइन आवेदन के लिए अलग वोसाइटानाई गई है। ऑन लाइन आवेदन से अभ्यर्थियों को सहूलियत हुई और भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में तेजी तो आई पर तकनीकी खामी से मुश्किलें भीाढ़ी हैं। अभ्यर्थियों का ऑन लाइन आवेदन पत्र तभी सामिट होता है, जा वेौंक में निर्धारित फीस जमा कर वहां से मिले ट्रांसफर चालान नांर को फार्म में फीड करते हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति तथा महिला अभ्यर्थियों से आवेदन की फीस नहीं ली जाती है इसलिए इनका आवेदन पत्रािना ट्रांसफर चालान नांर के भी सामिट हो जाता है। इसमें अभ्यर्थियों को कुछ खर्च नहीं करना पड़ता है। कुछ शरारती लोगों ने इसी का फायदा उठाते हुए कुत्ते,ािल्ली औरािजली के खंभे की फोटो लगाकर फर्जी नाम पते से आवेदन कर दिया। ऐसे 100 से अधिक आवेदन पत्र एसएससी को मिले हैं। फार्मों की स्क्रूटनी के वक्त यह मामला पकड़ में आया।
अभ्यर्थियों को आवेदन पत्र पर अपनी फोटो कम्प्यूटर से अटैच करनी होती है। स्क्रूटनी के वक्त अफसरों को ऐसा लगा कि फोटो गलत अचैट हो गई होगी पर जा उनका ध्यान आवेदक के नाम एवं अन्य सूचनाओं पर गया तो पता चला कि आवेदन ही सही नहीं हैं क्योंकि कई फार्म में नाम के स्थान पर अंग्रेजी वर्णमाला के कुछ अक्षर लिखे हुए थे। आ स्टोनोग्राफर ग्रेड ‘सी’ और ‘डी’ की भर्ती के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। इसका ऑन लाइन आवेदन तीस जून से प्रारंभ होगा तो अफसरों का अनुमान है कि इसमें भी इस तरह के फर्जी आवेदन हो सकते हैं।ोली रोड स्थित एसएससी मध्य क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक एके मिश्र कहते हैं कि किसी भी आवेदन पत्र को रद्द करने की एक निर्धारित प्रक्रिया है। अभ्यर्थियों को फार्म रद्द करने की वजह भीातानी पड़ती है। ऐसे फर्जी फार्मों की स्क्रूटनी में वक्र्ताााद होता है।
आनंद मिश्र, इलाहाााद
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