Sunday, July 26, 2009

मनोरंजन: बदलेगा कर निर्धारण का फार्मूला

-सकल कर निर्धारण प्रणाली में टिकट के दाम पर लगेगा कर
- इस बारे में अध्यादेश जारी, अधिसूचना का हो रहा इंतजार
सरकार मनोरंजन कर निर्धारण का नया फार्मूला लागू करने जा रही है। इस बारे में अध्यादेश जारी कर दिया गया है। अफसरों को अधिसूचना का इंतजार है। अधिसूचना जारी होते ही कर निर्धारण का तरीका बदल जाएगा। नया तरीका सिनेमा हॉल मालिकों को रास नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि मंद पड़े इस धंधे में इससे और मंदी आएगी क्योंकि मजबूरी में टिकट का दाम बढ़ाना पड़ेगा।
दाम कम होने पर सिनेमा हॉल में दर्शकों की संख्या लगातार घट रही है तो बढ़ोत्तरी के बाद क्या होगा, यह चिंता हर हॉल मालिक के चेहरे पर महसूस की जा रही है। सिनेमा प्रदर्शक संघ ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
दर्शकों से एक टिकट के एवज में जो रकम ली जाती है, उसे पाँच भागों में विभाजित किया जाता है। अगर 50 रुपये का टिकट है तो तीन रुपये अनुरक्षण (मेंटीनेंस) के लिए निकाल दिए जाते हैं जबकि 50 पैसे फिल्म विकास निधि, 60 पैसे एसी सरचार्ज होता है। अगर सिनेमा हॉल एयरकूल्ड है तो एयरकूल्ड चार्ज के तौर पर 25 पैसे और निकाले जाते हैं। इसके बाद जो 45.6५ रुपये बचते हैं, वह प्रवेश शुल्क होता है। वर्तमान में इसी प्रवेश शुल्क पर ही साठ फीसदी मनोरंजन कर लिया जा रहा है। कर निर्धारित करने का फार्मूला भी तय है। प्रवेश शुल्क की राशि में साठ का गुणा कर 160 से भाग दिया जाता है। इस प्रकार 50 रुपये के टिकट पर 17.१1 रुपये टैक्स देना होता है।
अब सरकार सकल कर निर्धारण प्रणाली लागू करने जा रही है। इसमें सिनेमा हॉल मालिक दर्शकों से टिकट का जितना दाम लेगा, उस पूरी रकम पर टैक्स लिया जाएगा। इसके बाद 50 रुपये के टिकट पर (५0 गुणे 60 भागे 160) 18.६5 रुपये टैक्स देना पड़ेगा। टैक्स की राशि बढ़ जाएगी इसलिए मजबूरन टिकट के दाम में इजाफा करना पड़ेगा। हॉल मालिक दाम बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।

'इस बारे में अध्यादेश जारी कर दिया गया है पर अभी अधिसूचना जारी नहीं हुई। अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि यह व्यवस्था किस रूप में और कब से लागू की जानी है।Ó
-सुबोध वर्मा, सहायक मनोरंजन कर आयुक्त


'इससे सिनेमा हॉल मालिकों की दुश्वारियाँ बढेंगी। खास तौर से छोटे सिनेमा हॉलों की। संभव है कि कई सिनेमा हॉल बंद हो जाएँ। सरकार को सिनेमा व्यवसाइयों को प्रोत्साहित करना चाहिए। पंजाब, हरियाणा, हिमांचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर में पिछले दो वर्षों में इस आधार पर मनोरंजन कर खत्म कर दिया गया कि सिनेमाहॉल गरीब जनता के मनोरंजन के एकमात्र साधन हैं जबकि दिल्ली और मध्य प्रदेश में मनोरंजन कर की दर 20 प्रतिशत है। यूपी में भी मनोरंजन कर 20 फीसदी किया जाना चाहिए।Ó
-मोहन सिंह, प्रबंधक, अवतार सिनेमा हॉल